बड़े मंदिर देया मालका

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॥ पावन पाठ ॥

बड़े मंदिर देया मालका,

मेरी अर्ज सुने ता जाना तनु,

जीवे होरा दे दुखड़े दूर किते,

जीवे मैनु भी बक्शी ता जाना मैनु,

बड़े मंदिर देया मालका

तू सी सब दे दिल दी जान दे हो,

हर मन दी गल पहचान दे ओ,

सब झोलियाँ भर भर ले जांदे,

मेरी भरो ता तहानु जाना मैं,

जीवे होरा दे दुखड़े दूर किते,

जीवे मैनु भी बक्शी ता जाना मैनु,

बड़े मंदिर देया मालका

तेरे नाम दे बड़े जो चड़ेया,

हर इक दी बाह नु तू फड़ेया,

तुसा लखा पार लंगा दिते,

जे मैनु भी तारे ते जाना मैं

जीवे होरा दे दुखड़े दूर किते,

जीवे मैनु भी बक्शी ता जाना मैनु,

बड़े मंदिर देया मालका

तेरी सिफ़्ता कर कर थक दे नहीं,

जो पा लेंदे ओह हठ दे नहीं ,

मेरा मन करदा तेरी सिफत करा,

जीवे चरनी लावे ता जाना मैं

जीवे होरा दे दुखड़े दूर किते,

जीवे मैनु भी बक्शी ता जाना मैनु,

बड़े मंदिर देया मालका

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।