हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब को जरा सा ज्ञान दे,

साई बाबा ये कहते है ऐसा कोई इंसान दे,

बिकसां दे बिकसां दे या तू अल्ल्हा की शान दे,

जिसको समज नहीं आती है साई ये बतलाता है,

रब न उसका राजी होगा जो भी दिल को दुखाता है,

दुशमन भी आ जाए घर में उसको भी तू मान रे,

बिकसां दे बिकसां दे या तू अल्ल्हा की शान दे,

जिसका रब से नात ना हो ऐसा कोई नाम बता,

उसके कर्म से जो न बना हो ऐसा कोई काम बता,

हो जाएगा जग में अमर तू उसके नाम पे ध्यान दे,

बिकसां दे बिकसां दे या तू अल्ल्हा की शान दे,

जीवन है अनमोल दीवाने इसका मोल नहीं होता,

उसको कदर नहीं पाने की जिसका कुछ भी नहीं खोता,

नाम की तेरे हयात मिले साई जी मुझे वरदान दे,

बिकसां दे बिकसां दे या तू अल्ल्हा की शान दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।