झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर

जसपिंदर नरूला
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भावें अज्ज मेहर कर, भावें कल मेहर कर,

झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर ।

तेरे द्वार ते सीस मैं झुकावंदी रवां,

गुण अठ्ठे पहर दाती तेरे गावंदी रवां ।

जेहड़ा दूर करे दुःख, दाती देदे ऐसा वर,

झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर ॥

जग मंगता सदा ही तेरे द्वार दा रवे,

तैनू रेहमता लई हर कोई पुकारदा रवे ।

जिहदी माता शेरा वाली अंग संग काहदा डर,

झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर ॥

झोली कदे वी किसे दी ‘केसर’ खली ना रवे,

तेरे दर तो निराश कोई सवाली ना रवे ।

तेरे दर ते दयालता दा वाग्दा ए सर,

झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर ॥

जिहदे सर उत्ते साया तेरे प्यार दा रवे,

‘जसपिंदर’ नू ख्याल तेरे द्वार दा रवे ।

कित्ता औखे वेले याद, गए डुब्दै वी तर,

झोली मेरी वी तू खुशीआं दे नाल दाती भर ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।