इक तारा बोले बंजारा बोले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

इक तारा बोले बंजारा बोले,

मैं भोलू ये दुनिया बोले ये जग सारा बोले,

इक तारा बोले बंजारा बोले

गलियों में वो घूम रहा था,

वफ़ा के मोती वो ढूंढ रहा था,

किसी को नजरे ढूंढ रही थी वो तो रब को ढूंढ रहा था,

मैं बोलू ये दुनिया बोले ये जग सारा बोले,

इक तारा बोले बंजारा बोले

दरिया में कश्ती डोल रही थी,

मौला मौला बोल रही थी,

चपु दरिया पार करवाए मिल जाएगा तुझे साहरा,

मैं बोलू ये दुनिया बोले ये दरिया का किनारा बोले,

इक तारा बोले बंजारा बोले

वली सन्ति सब उसका जलवा,

साई का तू समज इशारा,

सच्चे मन से कर ले इबादत होगी तुझपे रब की

मैं बोलू ये दुनिया बोले अपने रब का हो ले ,

इक तारा बोले बंजारा बोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।