चिंता न कर चिंता न कर

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॥ पावन पाठ ॥

चिंता न कर चिंता न कर खाली गया सिकंदर,

मन चंचल है तू हस ले कभी रोते नहीं सिकंदर,

चिंता न कर चिंता न कर खाली गया सिकंदर,

सफल है तेरा आना तुझे याद करे ज़ामना,

क्यों आँख में आंसू तेरे बेकार में नहीं बहाना,

सहज सहज को चलना तेरा बने गा मुकदर,

मन चंचल है तू हस ले कभी रोते नहीं सिकंदर,

जब कोई नहीं सहारा ओह रही ढूंढ ले प्यारा,

इक अकेला मारा दूजे ने जीवन सवारा,

बदले गई तेरी किसमत तेरी नाव चले समंदर,

मन चंचल है तू हस ले कभी रोते नहीं सिकंदर,

छोटा सा है जीवन इसे प्यार से सींच ले प्यारे,

खुशियों का थाम ले दमान कोई दूर नहीं किनारे,

तुझे चलना खुद के सहारे,

तेरे पाँव चले है कंकर,

मन चंचल है तू हस ले कभी रोते नहीं सिकंदर,

जब कोई नहीं है तेरा कर गुरु चरणों में बसेरा,

वो कहता है तू मेरा मैं आसरा तेरा,

उड़ जाना इक दिन सजन चन्दन की खुसबू बन कर,

मन चंचल है तू हस ले कभी रोते नहीं सिकंदर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।