अगर तुम्हारा धमाणा में जमवाय माता भजन

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अगर तुम्हारा धमाणा में दरबार नहीं होता

तो बेड़ा गरीबो का कभी पार नहीं होता

सारी दुनिया से मैं तो हार गया

रोते रोते तेरे दरबार गया

लगाया गले मुझे सहारा दिया

डूबती नइया को किनारा दिया

अगर तुम्हारे जैसा वहां दातार नही होता

तो बेड़ा गरीबो का कभी पार नहीं होता

अँधेरे बादल गम के छाये थे

कोई ना अपना,सभी पराये थे

थाम के हाँथ मेरा साथ दिया

जीवन में खुशियों की सौगात दिया

अगर तेरी नजरो में मेरा परिवार नहीं होता

तो बेड़ा गरीबों का कभी पार नहीं होता

अगर तुम्हारा धमाणा में दरबार नहीं होता

तो बेड़ा गरीबो का कभी पार नहीं होता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।