चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी

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॥ पावन पाठ ॥

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी,

दिन रात असि नाम तेरा जपदे रहिये,

सदा गुरु जी गुरु जी करदे रहिये,

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

दर्द विछोड़े वाला सहा नहीं जांदा,

इक पल दूर मेतो रहा नि जांदा,

साड़ी विनती करो कबुल गुरु जी,

चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी,

दिन रात असि नाम तेरा जपदे रहिये,

सदा गुरु जी गुरु जी करदे रहिये,

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

मेरे जेहा लखा तनु करण पुकारा,

तेरे बिना मेरा कोई होर न सहारा,

मैनु दर तो दूर न करो गुरु जी,

चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी,

दिन रात असि नाम तेरा जपदे रहिये,

सदा गुरु जी गुरु जी करदे रहिये,

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

करा अरदास मेरे गुरु जी तनु,

थोड़ी जाहि जगहा मिल जाये जे मैनु,

मैनु भगति दा रंग चढ़ जाये गुरु जी,

चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी,

दिन रात असि नाम तेरा जपदे रहिये,

सदा गुरु जी गुरु जी करदे रहिये,

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

रूह मेरी विच पा देयो फेरा,

प्यारे गुरु जी मैं जन तेरा,

मेरा रोम रोम करे शुकराना गुरु जी

चरना दे नाल जोड़ो गुरु जी,

दिन रात असि नाम तेरा जपदे रहिये,

सदा गुरु जी गुरु जी करदे रहिये,

साहनु अपने तो कदे न विछोड़ो गुरु जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।