कैसी बजाई तूने बांसुरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे,

हरे बांस की बांसुरियां ने मन मेरो हर लीनो,

सुध बुध भूली तान और मन की ऐसो जादू कीनो,

ओह री गुजरियां बरसाने की,

कोई सुने न मेरी बात सजनी,

नीन्दियाँ ना आई सारी रात,

कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे,

जल भरने मै यमुना के तट इक दिन गई अकेली.

मार्ग मैं मिल गयो नंदलाला किन्ही बहुत ठिठोली,

मार लकुट मोरी गागर फ्होड़ी,

कीन्हो बहुत उत्त्पत सजनी,

नीन्दियाँ ना आई सारी रात,

कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे,

मार लकुट मोरी गागर फ्होडी,

किहनो बहुत मोरी गागर फ्होड़ी,

कीन्हो बहुत उत्थ्पत सजनी,

नीन्दियाँ ना आई सारी रात,

कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे,

बैठ कदम्ब की डाल कन्हियाँ मुरली मधुर बजावे,

ब्रिज गोपीन के घर मैं कान्हा चोर चोरी दही खावे

देख सूरतियाँ मनमोहन की मुख से न बोलो जात सजनी

नीन्दियाँ ना आई सारी रात,

कैसी बजाई तूने बांसुरी नीन्दियाँ न आई सारी रात मोहे,

Aashish Kaushik

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।