भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

संत कबीर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

तन परिंदे को छोड़ कही उड़ जाये न प्राण परिंदा रे,

भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

झूठी सारी दुनिया दारी झूठा तेरा मेरा रे

आज रुके कल चल देगा ये जोगीवाला फ्हेरा रे,

भेद भाव को छोड़ दे पगले मत कर तू परनिंदा रे

भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

इस जीवन में सुख की कलियाँ और सभी दुःख के कांटें,

सुख में हर कोई हिस्सा मांगे कोई भी न दुःख बांटे,

सब साथी हैं झूठे जगत के सच्चा एक गोविंदा रे,

भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

इस चादार को बड़े जतन से ओढ़े दास कबीरा रे,

इसे पहन विषपन कर गई प्रेम दीवानी मीरा रे,

इस चादर को पाप करम से मत कर तू अब गन्दा रे.

भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे

Aashish Kaushik

www.aashishkaushik.in

http://bit.ly/2JJMqA4

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।