साई क्या करू तारीफ तेरी

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॥ पावन पाठ ॥

साई क्या करू तारीफ तेरी,

तू ही दीखता हर मंजर में इस ज़मीन और उस अम्बर में,

हर जगह है तू ही तू,

साई तू साई तू साई तू,

साई क्या करू तारीफ तेरी,

मेरी हर इबादात में तुम आरजू में तुम ही तुम,

मेरी दिल की हर धड़कन में यु वसे हो तुम ही तुम,

तेरे बिन तो कुछ भी नहीं मैं दुनिया सब की मेरा तू,

साई तू साई तू साई तू,

साई क्या करू तारीफ तेरी,

तेरी शान तो सब से आली,

बस तू ही इक नेक है,

तेरा कहना मैं कहता हु सबका मालिक एक है,

मेरा मोला मेरा साई बन गया है तू ही तू,

साई तू साई तू साई तू,

साई क्या करू तारीफ तेरी,

मेरे हर अल्फाजो में तुम मेरे हर खवाबो में तुम,

चाहु कर्म बस इतना साई कभी जुदा न होना तुम,

जब से आया तेरी शिरडी मेरी हर सांसो में तू,

साई तू साई तू साई तू,

साई क्या करू तारीफ तेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।