वो जो बैठे है शिरडी में डेरा डाल के

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॥ पावन पाठ ॥

वो जो बैठे है शिरडी में डेरा डाल के,

है कमाल के है कमाल के,

शिरडी है इक स्वर्ग नगरियां,

मस्ती है याहा द्वारका मइयाँ

साई बैठे फकीरी का वेश डाल के,

है कमाल के है कमाल के,

नीम की ठंडी मीठी छाया,

यहाँ बना गुरु स्थान तुम्हरा,

याहा जलवे दिखाते अपने जमाल के,

है कमाल के है कमाल के,

जगमग करती साई की धुनि,

मंगल करती हर अन होनी,

काट देते है वो बंध मोह माया चाल के,

है कमाल के है कमाल के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।