शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई

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॥ पावन पाठ ॥

शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई,

मुझको दर पे भुलाया मजा आ गया,

तूने सब कुछ किया और इतना दियां,

जबसे चरनो में आया मजा आ गया,

शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई,

कुछ लोग मुझे आज मिटाने में लगे है,

साईं जी मेरी लाज बचाने में लगे है,

शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई,......

उनकी गलियों का मंजीर निगाहों में है,

जो न पाया कही उनकी राहो में है,

तेरी दीवानगी का नशा हो गया,

जबसे दर्शन है पाया मजा आ गया,

कर्म तुम न करोगे तो कर्म कौन करेगा,

साईं जी मेरी झोली को फिर कौन भरे गा,

शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई,

मैं हु कमली दीवानी तेरे नाम की,

दो सहारा ये दुनिया नही काम की,

मेग खुशियों का बरसा यहाँ आकाश से.

फिर अभी ने है गाया मजा आ गया,

शिर्डी वाले की मुझपर नजर हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।