तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां,

कुछ मन में लाया है तेरा जोगियां,

मुझे दर्शन अपना करवा दे मेरे मन की प्यास भुजा दे,

तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां

कब मैंने ये सोचा था इक दिन शिरडी मैं आउगा,

और देख के तेरी सूरत साई भूल न सब जाउगा,

मैं साई दीवाना हु ये सारे जग से मैं कह दूंगा,

मैं छोड़ के सारी दुनिया तेरे कदमो में रह लूंगा,

तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां

ये आस लगा के आया हु मेरे मन का फूल खिला दे,

बीच भवर में नाव फसी है उसको पार लगा दे,

सारे जहां में मेरे साई तेरी धूम मची है,.

जो देखे तेरा ही हो जाये कैसी जादू गरी है,

तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां

तू सब को ही देता है मैं भी तुझसे ही तो लूंगा,

अगर देर करि तूने मैं दुनिया से ये कह दूंगा,

मैं जान हथेली पर रख कर तेरे दर पर ही आया हु,

तेरे दर पर मैं साई अपनी फर्यादे ही लाया हु,

तेरे दर पे आया है तेरा जोगियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।