मैं लाडला खाटू वाले का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना गोर का ना काले का घनश्याम मुरली वाले का,

मैं लाडला खाटू वाले का,

भारत में राजस्थान है अरे जयपुर जिसकी शान है,

जयपुर के पास ही रींगस है रींगस से उठता निशान है,

भगतो के पालनहारे का घनश्याम मुरली वाले का,

मैं लाडला खाटू वाले का,

दुनिया में निराली शान है कहलाता बाबा श्याम है,

कोई फूल चढ़ा ले जाता है कोई छपन भोग लगाता है,

सब को खुश रखने वाले का घनश्याम मुरली वाले का,

मैं लाडला खाटू वाले का,

जो मैंने कभी न सोचा था यहाँ कोशिश से न पौंछा था,

मेरे श्याम ने मुझको बचा लिया मुझे मंजिल तक पहुंचा दियां,

कन्हियाँ मुरली वाले का घनश्याम मुरली वाले का,

मैं लाडला खाटू वाले का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।