साई माला तू दिल से घुमाले के साई दौड़े दौड़े आएंगे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

साई माला तू दिल से घुमाले के साई दौड़े दौड़े आएंगे,

दौड़े दौड़े आएंगे साई दौड़े आएंगे,

मेरे साई आएंगे साई बाबा आएंगे,

साई माला तू दिल से घुमाले के साई दौड़े दौड़े आएंगे,

जितना न सोचा होगा उतना तू पायेगा,

साई नाम वाली जो तू लगन लगाये गा,

ज्योत साई वाली मन में जगा ले,

के साई दौड़े आएंगे....

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कोई न छोटा बड़ा साई दरबार में,

साई सदा खोये रहते भक्तो के प्यार में,

सच्चे मन से तू साई को भुलाले,

के साई दौड़े दौड़े आयेगे..

माला के मोतियों में छुपे साई नाथ है

जपले तू साई साई साई चारो धाम है,

चंदन उहदी तू मस्तक पे लग ले,

के साई दौड़े दौड़े आयेगे ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।