वे मैं सद के लालरियाँ जावा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वे मैं सद के लालरियाँ जावा चुनी नु रंग दें वालेया,

जींद तेरे चरना विच लावा चुनी नु रंग दें वालेया,

जिह्ना राह मेरा आया ललारी ओहना रहा दे मैं सदके वारि,

वे मैं रस्ते च पलका विछावा चुनी नु रंग दें वालेया,

वे मैं सद के लालरियाँ जावा चुनी नु रंग दें वालेया,

एह ललारी मेरा सब तो निराला,

ज्ञान दा रंग चडावां वाला,

वे मैं तन मन अपना रंगवा,चुनी नु रंग दें वालेया,

वे मैं सद के लालरियाँ जावा चुनी नु रंग दें वालेया,

ऐसी चुनी मेरे हरी ने रंगाई,

तार तार विच होइ रोशनाई,

वे मैं रीजा दे नाल हंडावा,चुनी नु रंग दें वालेया,

वे मैं सद के लालरियाँ जावा चुनी नु रंग दें वालेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।