जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां

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॥ पावन पाठ ॥

जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां बैंड बाजे दोने हथ झंडे फड़ के,

खींची नि तयारी आज तेरे भगता सुबह उठ तड़के,

जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां

करिया मुरादा तू ते सबे पूरियां ,

देसी घ्यो दी बचे अज खान चुरियाँ,

घर साढे छड़ी बाबा कोई थोड़ न,

देखदे ने कोठी सबे खड़ के,

जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां

तरेया रंगा विच रंगे रहने आ,

सुबह उठ सदा तेरा नाम लेने आ,

नंगे नंगे पैरी अज पहुंचे गुफा ते,

उचियाँ चढ़ाइयाँ जोगी चढ़ चढ़ के,

जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां

देदे तू दीदार साहनु पौनहारियाँ,

कर दे निहाल साहनु दुधाधारियां ,

लुधिआने वाला जग्गी रखे बाबा जी तेरी तस्वीर सीने विच जड़ के ,

जोगियां दरा ते तेरे लेके आये हां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।