हे जिनवाणी माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन जैन भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे जिनवाणी माता,

समय दर्शन ज्ञान चारित्र तू ही सुख दाता,

हे जिनवाणी माता

सुर नर मुनि ग्यानी तुझको है ध्याते,

सुख शान्ति ज्ञान माता अद्भुत है पाते,

तू ही भव से तारण हारि तेरे गुण गाता,

हे जिनवाणी माता

भव पार कर ने की पतवार है तू,

दुःख दूर करने का आधार है तू ,

तेरा मरहम जान ने से जीवन जग मगाता,

हे जिनवाणी माता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।