मेरी हाज़री लग जाए गुरूजी के सत्संग में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरी हाज़री लग जाए गुरूजी के सत्संग में,

गुरु जी के सत्संग में मेरी हाज़री लग जाये,

मुझे सतगुरु मिल जाये,

गुरु जी सत्संग में मुझे सतगुरु मिल जाये,

मेरी हाज़री लग जाए गुरूजी के सत्संग में

मुझे दर्शन हो जाये गुरु जी के संत्संग में,

मुझे दर्शन हो जाये,

मेरी हाज़री लग जाए गुरूजी के सत्संग में

गुरु जी सत्संग में मुझे सतगुरु मिल जाये,

मेरी बिगड़ी बन जाये गुरु जी के सत्संग में,

मेरी बिगड़ी बन जाये,

मेरी हाज़री लग जाए गुरूजी के सत्संग में

गुरु जी सत्संग में मुझे सतगुरु मिल जाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।