कोई पहुंचा दो सन्देश मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

आँखों में आंसू आते है मन लगता नहीं गुरु जी तुम बिन,

कोई पहुंचा दो सन्देश मेरा,

मन लगदा नहीं गुरु जी अब तुम बिन

न मिलते अगर कोई बात नहीं,

अब मिल ही गये तो दुरी क्यों,

ना दिखती अगर सूरत तेरी,

तो मन वैरागी होता क्यों,

अब इक इक पल मेरे गुरु जी,

लगता है बीत गये कई दिन,

कोई पहुंचा दो सन्देश मेरा,

कई बार जीया कई बार मरा,

अब मर मर के ना जीना मुझे,

सब कहते है तुम सुनते हो मेरी सुनो विनय तो जानू तुम्हे,

मेरी लागि लगन तुम संग गुरु जी,

अब महका दो मेरा हर दिन,

कोई पहुंचा दो सन्देश मेरा

अपना न कोई इस जग में मेरा,

सब स्वार्थ के ही रिश्ते है,

सुखो के साथी सब मेरे,

दुःख आये तो दूर ही दीखते है,

मेरी श्रद्धा के फूलो को गुरु जी,

चरणो मे रखना हर इक दिन,

कोई पहुंचा दो सन्देश मेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।