प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम

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॥ पावन पाठ ॥

प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम,

कौन हु कैसी दुनिया से आये हो तुम,

चाँद तारो में भी मुस्कुराते हो तुम,

मेरी रग रग में कैसे समाये हो तुम,

प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम,

कौन हु कैसी दुनिया से आये हो तुम,

सच बता दो कही तुम खुदा तो नहीं,

फूल कलियों में भी मुस्कुराते हो तुम,

प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम,

कौन हु कैसी दुनिया से आये हो तुम,

शुक्र है इस दफा आप मिल तो गये,

मेरी खातिर बशर बन के आये हो तुम,

प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम,

कौन हु कैसी दुनिया से आये हो तुम,

जरा जरा है रोशन फ़क्त आपसे,

कटरे कटरे में देखा समाये हो तुम,

प्यार का इक जहां साथ लाये हो तुम,

कौन हु कैसी दुनिया से आये हो तुम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।