खो गया दिल मेरा

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

भगत कब से खड़े है कतारों में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

मुझे न धन दोलत न यश चाहिये बस तेरे नाम का बाबा रस चाहिये,

हो असर साईं मेरी पुकारो में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

थोड़ी भगती से रीज जाते हो तुम,

जो पुकारे कोई दोड़े आते हो तुम,

बात हो जाये अब तो इशारों में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

तेरी महिमा का किसे न पार पाया,

जो भी दर आया झोली भर लाया,

तेरा जलवा है भागो बहारो में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

ज्योत के धुप में मैंने पाया तुझे,

तूने दर्शन दिये साईं आ के साईं मुझे,

वस् गया तू ही सांसो की तारो में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

रवि चन्द्र की सुनो फरयाद बाबा,

तुझे आना पड़े गा मेरे घर आज बाबा,

रोशनी है तेरी चाँद तारो में,

खो गया दिल मेरा शिरडी के इन नजारों में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।