उलझ मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

उलझ मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छुट जाते है सहरो का बरोसा क्या,

तमनाये जो तेरी है फुहारे है वो सवान की,

फुहारे है सुक जाती है फुकारो का भरोसा क्या

दिलासे यो यहाँ के सभी रंगिन नजारे है,

नजारे रूसे जाते है नजारों का भरोसा क्या,

इन्ही रंगीन गुबारों पर आरे दिल क्यों फ़िदा होता,

गुबारे फुट जाते है दुबारो का भरोसा क्या,

तू हरी का नाम लेकर के किनारों से किनारा कर,

किनारे कूट जाते है किनारों का भरोसा क्या,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।