ये दो दिन का जीवन तेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये दो दिन का जीवन तेरा,

फिर किस पर तू इतराता है,

ये जीवन है चंद सांसो का फिर क्यों तू भुला जाता है,

ये दो दिन का जीवन तेरा

माटी की तेरी ये काया नशवर जग की छाया है,

धन वेव्हाव और सूंदर यौवन चलती फिरती ये माया है,

तेरा सारा सपना झूठा है सत धर्म यही बतलाता है,

ये दो दिन का जीवन तेरा

पापो की गठरी का भोजा तेरे कंधो पर जाना है,

अपनी करनी अपनी भरनी फिर क्यों इतना दीवाना है,

अब तो सम्बल कर चल माथुर क्यों जीवन व्यर्थ गवाता है,

ये दो दिन का जीवन तेरा

तू खाली हाथो आया है और हाथ पसारे जाएगा,

अपना जिस को तू मान रहा सब यही धरा रह जाएगा,

अपनी न समजी की खातिर क्यों जीवन भर दुःख पाता है,

ये दो दिन का जीवन तेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।