मैं बरसाने की छोरी ना कर मोते बरजोरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं बरसाने की छोरी, ना कर मोते बरजोरी

तू कारो और मैं गोरी, अपनों मेल नहीं

मैं तोसे बांधू प्रीत की डोरी, करता fail नहीं

शुक्र कारो की पड़े नहीं यशोदा मैया के डंडे

एक डांट में है जाते अरमान तुम्हारे ठन्डे

मैं नन्द बाबा का लाला मैं तो ना डरने वाला

तेरा पड़ा हैं मोसे पाला करता खेल नहीं

मैं गुजरी तू गवाला, अपनों मेल नहीं

मैं बरसाने की छोरी...

जहाँ जहाँ मैं जाती हूँ क्यों पीछे पीछे आए

तेरो मेरो मेल नहीं, यह कौन तुम्हे समझाए

तू मुझको ना पहचानी, पिया घाट घाट का पानी

मैं दरिया हूँ तूफानी करता खेल नहीं

अरे ना कर मोसू छैतानी, अपनों मेल नहीं

मैं बरसाने की छोरी...

ऐसी वैसी नार नहीं क्यों मोपे डोरे डाले

बीच डगर में छोड़ सतानो, ओ गोकुल के ग्वाले

मेरा रोज का आना जाना, नरसी का माखन खाना

‘शर्मा’ है श्याम दीवाना करता खेल नहीं

अरे तू गोकुल मैं बरसानो, अपनों मेल नहीं

मैं बरसाने की छोरी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।