उठ के सवेरे तेरे दर आवा

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॥ पावन पाठ ॥

उठ के सवेरे तेरे दर आवा जोगियां तेरे दर्शन दी मारी,

सब न दे दिला दियां जान दा है तेरी लगदी है सूरत प्यारी,

उठ के सवेरे तेरे दर आवा जोगियां

तक तक सोहना रूप दिल नहियो रज दा,

नाची जावा जदो तेरा चिमटा है वज्दा,

रत्नो दे पाली तेरे चरना दे विच मेरी ज़िंदगी बीत जाये सारी,

उठ के सवेरे तेरे दर आवा जोगियां

रुतबा है उचा तेरा शाहतलाइयाँ वालेया,

भरी है ओह्दी झोली जिहने तनु है ध्या लिया,

हर जेथे इतवार सिद्ध जोगियां देवे भगत तेरी पुजारी,

उठ के सवेरे तेरे दर आवा जोगियां

मनु नवसेहर दा प्रीत तेरा दास है,

रखी धमिंदर भी तेरे उते आस है,

घर साड़े भी कदे आ जोगियां सोहने मोर उते करके सवारी,

उठ के सवेरे तेरे दर आवा जोगियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।