तेरे दर न कोई दरबार

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

चले पवन भी खुश्बूधार ठंडी छाओ है तेरे दवार,

तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,

झुकता है सारा संसार तेरे दर सा न कोई द्वार,

तेरे द्वार सुहे रंग उठे मन में रंग,

संतो भक्तो के संग नाचे मस्त मलंग,

हो रही चारो दिशाओ जय जय कार,

तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,

झुकता है सारा संसार तेरे दर सा न कोई द्वार,

योगी भोगी दरवेश पाये ज्ञान उपदेश तुम्हे पूजते गणेश ब्रह्मा विष्णु महेश,

वेद रचना पुराण युग चार,

तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,

झुकता है सारा संसार तेरे दर न कोई द्वार,

मैया कल और आज मेरे मन पे तेरा राज,

तू सवारे सब के काज राखे भक्तो की लाज,

सिर जीवन फिरोज आये द्वार,

तेरे दर न कोई दरबार आके झुकता है सारा संसार,

झुकता है सारा संसार तेरे दर न कोई द्वार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।