मेरी माता रानी ने ऐसा कर्म कमाया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माता रानी ने ऐसा कर्म कमाया है,

मुझ जैसे पापी को दरबार भुलाया है

ना खाब में सोचा था मुझे चिठ्ठी आएगी,

लेकिन मेरी माता ने मुझे द्वार भुलाया है,

कुदरत है यहाँ झुकती बड़ा अजब नजारा है,

माँ शेरोवाली की बड़ी अजब ये माया है

मैंने देखा है इस दर पे हर वर्शर दीवाना है,

चेहरों की रंगत ने क्या नूर चढ़ाया है

बड़ा कर्म किया मुझपे इस करमो वाली ने,

तेरी रमज को लेकर मैं कभी समज न पाया है,

मेरी माता रानी ने ऐसा कर्म कामया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।