दुनिया के जमले में फस कर हम

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया के जमले में फस कर हम असल ठिकाना भूल गये,

जो वादा करके आये थे सब कॉल निभाना भूल गये,

दुनिया के जमले में फस कर हम असल ठिकाना भूल गये

दुनिया में हम ने जन्म लिया भगवान् के दर्शन पाने को,

दुनिया का तमाशा क्या देखा घर लौट के आना भूल गये,

दुनिया के जमले में फस कर हम असल ठिकाना भूल गये

वीरान पड़े खंडरो की जगह थे महल कभी महाराजाओ के,

खुदवाई थे नाम जो पथरो पर सब बन पाँव की धूल गये,

दुनिया के जमले में फस कर हम असल ठिकाना भूल गये

हम देख रहे थे रोज रोज मरघट में लासे जलते हुये,

कितने आये और चले गये हम अपना दिल न भूल गये,

दुनिया के जमले में फस कर हम असल ठिकाना भूल गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।