जोगी जी आया मैं दर्शन नु

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॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध जोगी पौणाहारी आओ करके मोर सवारी,

जोगी जी आया मैं दर्शन नु मथा टेकन नु,

जी करदा तेरी धूल मथे नु ला लाइये,

कोई थोड़ रहे न खुशियां सारी पा लाइये,

एह जीवन है अनमोल ते सफल बना लिये,

कुल जग दा पालनहार ते शीश झुका लाइये,

इ के बार दर्श दिखा जा मेरे सिद्ध जोगी जी आजा,

मैं आया दर्शन नु....

आया चेत महीना दर ते मेले लगदे ने,

तेरे दर्शन करण नु खुशिया मन विच सब दे ने,

तू सब दे दिल दियां जाने खैरा पौंदा एह,

हर दुखियाँ दरदी दा तू कष्ट मिटाउँदा है,

मैं भी करदा अरदासा सब पूरी करो मेरी आसा जोगी जी,

मैं आया दर्शन नु....

तेरा किना सोहन शाहतलियाँ डेरा नहीं,

तेरे दर तो जान नु दिल न करदा मेरा नि,

दासी ने पाया नाल प्रीता सचियाँ नि,

संजू ओंजळा ने ही तेरी रेहमता नाल ही लिख्या नि,

जो भी मंगिया सो पाया तेरे दर ते जो भी आया,

जोगी जी आया मैं दर्शन नु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।