आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां

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॥ पावन पाठ ॥

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

सारे मेरे नाल मैं तेरे भाजो इकली आ,

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

तेरियां उडीका विच जींद मूक जावे ना,

डोरी एह स्वासा वाली बाबा रुक जावे न,

तेरियां जुदाइयाँ साथो झलियाँ नहीं जांदियाँ,

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

हर वेले तक दे है आसि रावा तेरियां,

आवि जा तू नाथा केहड़ी गालो लावे देरियाँ,.

हार भणावा चुन चुन कलियाँ,

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

पाऊं नु दीदार तेरा तरसन अँखियाँ,

आवे गा जरूर बाबा आसा साहनु पाकियाँ,

टोल दी फिर मैं तनु कस गइयन कलियाँ,

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

कर दा अर्ज बलवीर हथ जोड़ के,

केहड़ी ग्लो बैठ गया बाबा मुख मोड़ के,

तेरी आ दीवानी जिहदा लोकि कहन्दे झलि आ,

आयो बाबा जी गरीबा दियां गलियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।