बारह साल कराली मेतो नौकरी

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॥ पावन पाठ ॥

बारह साल कराली मेतो नौकरी पूत पूत आखदी रही,

माँ बन के भी आज हो गई ओपरी पूत पूत आखदी रही

रोटी ते मैनु रख के नौकरी बारहा साली मारी ठोकर,

कदे किती न गल कोई प्यार दी पूत पूत आखदी रही

पाली बन के चारियां गाइयाँ,

माँ हो इसने तोहमता लाइया,

रीत उलटी ही देखि संसार दी पूत पूत आखदी रही,

माँ बन के भी आज हो गई ओपरी पूत पूत आखदी रही

कदे भी बह के हाल न पूछियां जो तू कमाया क्यों तू बचैया,

पाली बन के नित रही ताड़ दी,पूत पूत आखदी रही,

माँ बन के भी आज हो गई ओपरी पूत पूत आखदी रही

याद रखी लाल योगी दा कहना,

मोह दे बंधन मावा बेहना,

झूठे लारिया ते नित रही पाल दी,

पूत पूत आखदी रही,

माँ बन के भी आज हो गई ओपरी पूत पूत आखदी रही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।