दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया

पारंपरिक
माँ गंगा भजन बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

चरना दे नाल प्यार मैनु हो गया,

हर दम रेह्न्दियाँ सोच विचारा कदो मैं गंगा जल ले आवा,

लेके बाबे दे चरण धोआवा नाम दा खुमार खुमार मैनु हो गया,

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

हर दम रेह्न्दियाँ सोच विचारा कदो मैं फुल्ला दे हार ले आवा,

लेके बाबे दे गल विच पावा नाम दा खुमार खुमार मैनु हो गया,

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

हर दम रेह्न्दियाँ सोच विचारा कदो मैं बाबा नु सिंगी ले आवा,

लेके बाबे दे गल विच पावा नाम दा खुमार खुमार मैनु हो गया,

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

हर दम रेह्न्दियाँ सोच विचारा कदो मैं बाबे नु पहुये ले आवा,

लेके बाबे दे चरनी पावा नाम दा खुमार खुमार मैनु हो गया,

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

हर दम रेह्न्दियाँ सोच विचारा कदो मैं बाबे नु रोट ले आवा

लेके बाबे बाबे नु भोग लावा नाम दा खुमार खुमार मैनु हो गया,

दाते दा दीदार दीदार मैनु हो गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।