साड़ी कुक सुनी तू

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॥ पावन पाठ ॥

साड़ी कुक सुनी तू बोहडावालेया,

तेरे बाज साडा दुखा विच वास है,

कदो देवेगा दीदार बोहड़ावालेया साडे भुलैया दी एहो अरदास है,

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा

नाम तेरे दे बाबा मैनु राति सपने आउंदे ने,

सेवा करके सेवक तेरे मन दी मुरादा पाउंदे ने,

हुन होजा तू दयाल बोहडावालेया,

तेरे बाज साडा दुखा विच वास है

शीश सुनहरी जटा सुहावे बगल च झोली चिमटा है,

अंग भभूति पैरी पहुये मोर सवारी करदा है,

हुन आजा तू बोहडावालेया,

तेरे बाज साडा दुखा विच वास है

दुरो दुरो संगता बाबा दर तेरे ही आउंदिया ने,

रोट मणि परशाद बना के दर तेरे ही ांदियाँ ने,

हुन भोग ले बोहडावालेया,

तेरे बाज साडा दुखा विच वास है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।