तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा

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॥ पावन पाठ ॥

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा,

तन मन धन सब चरना च वारा

सूखा दा वेले तनु याद न किता सी,

दुखा दे वेले तनु पेय आवाजा मारा,

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा,

इतनी तो शक्ति देना सुन लो मेरे बाबा जी,

ओ जेहड़ा वेला आवे ओहनू हस् के गुजारा,

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा,

दीन ते दुखियाँ दी पुकार सुनन वालेया,

कदो तक न सुने गा मेरियाँ पुकारा,

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा,

तेरे दर छड़ना नहियो सुन लो मेरे बाबा जी,

लगी होइ भाजी भावे जीता भावे हारा,

तनु न बिसारा सरे जग नु बिसारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।