जन्म जन्म से मुझे बाबा जी से प्यार था

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॥ पावन पाठ ॥

जन्म जन्म से मुझे बाबा जी से प्यार था,

आज भी है और कल भी रहेगा

मैं अदम पापी हु बाबा जी तुम तारण हारे हो,

दुष्टो को मारने वाले भगतो के सहारे हो.

लिया है सहारा मैंने तेरे नाम का द्वार तेरे आने का,

आता रहुगा दर्शन पाता रहुगा,

जन्म जन्म से मुझे बाबा जी से प्यार था

तेरी महिमा न्यारी है बाबा जी सब के मन भाई है

इक बार करे जो बाबा तेरे दर्शन को आई,

पाता वही मनुष्य सच्ची मुराद है,

कहता बार बार है,आता रहुगा गुण गाता रहु गा,

जन्म जन्म से मुझे बाबा जी से प्यार था

तुम हो तो प्यारा है हर दिल को लुभाता है,

तेरा नूर ही ऐसा है जो हर दिल को हिलाता है,

किया है प्यार मैंने तेरे नाम का भक्ति के जाम का,

बोले को दर्शन दिलाना पड़ेगा,

जन्म जन्म से मुझे बाबा जी से प्यार था

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।