ते उतो कहंदा गल न करि

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जोगी बन के लूट लई माँ के उतो कहंदा गल न करि,

की दसा मैं तनु अडिये इस जोगी दे कारे

मावा कह के लूट लिया मैनु आके मेरे द्वारे,

कोई दस्य न अपना था ते उतो कहंदा गल न करि,

भर भर होक कत्तदी वेला रो रो रेन गुजरा,

नाम दीवानी हो गई चली ठाठ ठाठ आवाजा मारा,

कोई दसया न अपना था ते उतो कहंदा गल न करि,

जोगी बन के लूट जाऊ मैनु मैनु भरम न कोई ,

कड कलेजा पा लिया रती शर्म न होइ,

धक्का दे गया फड़ के ब्याह ते उतो कहंदा गल न करि,

काया माया आणि जानी दुनिया भरम भुलेखा,

कर्म दे खेल ने सब सारे लेना देना लेखा,

ेथे कोई किसे दा न ते उतो कहंदा गल न करि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।