माहरी भी सेवा को थोड़ो स्वाद चख ले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सेवकियाँ में दादी माहरो नाम लिख ले,

माहरी भी सेवा को थोड़ो स्वाद चख ले,

चाकरी धनि ही मिली जावे संसार में,

पर माहरो मनड़ो लागे थारे दरबार में,

टाबरा की छोटी सी या बात रख ले,

माहरी भी सेवा को थोड़ो स्वाद चख ले,

जमकर मियां थारी हज़ारी बजावेगा,

सेवक हा साँचा थारे मुख से काहुहावंगा,

आजमा के चाहे माँ ने आज देख ले,

माहरी भी सेवा को थोड़ो स्वाद चख ले,

हाजरी भजाया बिना माँगन ताहि आवा हा,

दुनिया कवे गी सोनू बैठा बैठा खावा हा,

चाकरी ने देकर माहरी लाज रख ले,

माहरी भी सेवा को थोड़ो स्वाद चख ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।