तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार

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॥ पावन पाठ ॥

सब से बड़ी सरकार तेरी सबसे बड़ी सरकार,

तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार,

हम ने तो लिख दिया है दादी जीवन तेरे नाम,

गाते रहे भजन तेरा माँ करते रहे गुण गान,

वस् तेरा आधार मियां बस तेरा आधार,

तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार,

इक यही दरबार यहाँ से कोई न खाली आये ,

देते ये न थकती हम लेते लेते थक जाये,

भर देती भण्डार मियां भर देती भण्डार,

तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार,

हे कुल देवी तेरे भरोसे है परिवार हमारा,

हम भक्तो को झुँझन वाली है आधार तुमहरा,

करे जो तुमसे प्यार उसका हो जाये वेडा पार,

तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार,

जिस धरती पे मंदिर तेरा धन्य वो राजस्थान,

जय जय मियां रानी सती जी जय जय झुँझन धाम,

जग की पालनहार तू ही जग की पालनहार,

तेरा झुंझनू में दरबार तेरी हो रही जय जयकार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।