अरे लेके गणेश को कहा जावे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

अरे लेके गणेश को कहा जावे,

कहा जावे गोरा कहा जावे,

सुन भोले पीहर जाऊगी कभी लौट के मैं न आउंगी,

अरे लेके गणेश को कहा जावे,

मैं तंग आप से हो गई मेरी सौतन भंग हो गई,

अरे लेके गणेश को कहा जावे,

अरे मान ले गोरा रानी मेरी बात मना रहे है तुमको भोले नाथ,

अरे छोड़ दो भोले पिया मेरा हाथ मैं न रहु कैलाश पे तेरे साथ,

हट छोड़ दे तप छोड़ दे करे काहे तंग क्यों पीते भंग,

जो बिना भुलाये जाओगी पीहर में न इजात पाओगी

अरे लेके गणेश को कहा जावे,

तुम भोले संशनी मस्तमलंग कैसे भोले रहु तुम्हरे संग,

अगर में थारे ोहगड मस्त मलंग काहे व्याह रचाया मेरे संग,

तेरे प्रेम में मैं तो खो गई करे व्यिहा तेरी हो गई,

मेरे प्रेम का बंधन तोड़ के कहा जाये रे गोरा छोड़ के,

अरे लेके गणेश को कहा जावे,

इक शर्त पे रहु तुम्हारे संग छोड़ न होगी भोले तुम भंग,

आशा गोरा छोड़ दी मैंने भंग लौट के चल कैलाश पे मेरे संग,

भोले पिया करदो छमा अब घर चलो गणपत की माँ,

तुम्हे छोड़ के न जाऊ पिया तुम्हे भोले मैंने वचन दियां

देखो गणेश भी मुश्कावे बेराग कलेश कट जावे,

अरे झडा सारा मिट जावे जो राजी नामा हो जावे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।