साइयाँ मेरा वि घर हॉवे

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॥ पावन पाठ ॥

ओ साइयाँ मेरा वि घर हॉवे उते करमा दी छा होवे,

मेरे दरवाजे ते लिखियाँ पंजा पीरा दा ना होवे,

साइयाँ मेरा वि घर हॉवे.........

बड़े चावा ते रीजा नाल मैं दर सजावा गा,

दीवे दरवाजे वाला गा मैं महफ़िल जद करावा गा,

ला दे हर रोज खुशियां दा मेरे घर विच समा होवे,

साइयाँ मेरा वि घर हॉवे........

बने लंगर जदो घर विच मौला मासुम ावन गे,

रखन गे पैर जद वेहड़े मेरी किस्मत जगावण गे,

ख्वावा मैं जिथे लंगर कोई ऐसी भी था होवे,

साइयाँ मेरा वि घर हॉवे.....

दुआ पूरी होवे जिस वेले ओ वेला वखा साइयाँ,

तू सुन्दा है गरीबा दी मेरी भी गल बना साइयाँ,

सूखा दा चन रवे चढ़ दा दुखा दा हर दिन भरा होवे,

साइयाँ मेरा वि घर हॉवे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।