नाम दी चाभी लाके खोल दे मन मंदिर दे द्वार माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अर्ज गुजारी आज माँ तेनु,

चरना दे विच रख ले मेनू ,

गुण औघन न देख माँ मेरे,

दर आया हां चल के तेरे ,

फौजल पार उतार माँ,

नाम दी चाभी लाके खोल दे मन मंदिर दे द्वार माँ,

विच गरीबी रुलेया हां माँ पर न तेनु भुलेया हां माँ,

पर न तेनु भुलेया हा माँ नाम दा रंग चदा दे मेनू सदा ध्याऊ दिल विच तेनु,

बन के तबेया तार माँ,

नाम दी चाभी लाके खोल दे मन मंदिर दे द्वार माँ,

तू दाती है सारे जग दी खाली झोली भरदी सब दी,

दे के दाता झोली भरदे जग ते नाम मेरा भी करदे ,

पापी पथर तार माँ,

नाम दी चाभी लाके खोल दे मन मंदिर दे द्वार माँ,

ज्योत जगा दे मन विच मेरे प्रीत भी चरनी लग गया तेरे,

मन मंदिर विच ला ले डेरे आलेवाली घर पावी फेरे करने दर्श दीदार माँ,

नाम दी चाभी लाके खोल दे मन मंदिर दे द्वार माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।