साहनु इक वारि अपने बना ले जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

साहनु इक वारि अपने बना ले जोगियां,

चाहे सुई वाले नके को नंगा ले जोगियां,

दर तेरे आउंदे होइयाँ तीन पीढियां,

रखियां प्यार विच भिन पीढियां,

गल जिथे अजा मूक दी मुका ले जोगियां,

साहनु इक वारि अपने बना ले जोगियां,

तेरिया गुलामा दा मैं निक्का जेहा गुलाम आ,

लोकि कहन्दे ख़ास मैं ता आमा तो भी आम आ,

हाथ मेहरा वाला सिर ते टिका ले जोगियां,

साहनु इक वारि अपने बना ले जोगियां,

चौंकियाँ ने बाबा तेरे धुनें आगे भरियाँ,

गुफा उते आके कोई कोई गलती न करि आ,

झूठ बोलदे ता खल साड़ी ला ले जोगियां,

साहनु इक वारि अपने बना ले जोगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।