प्यार के दीप जला जा साई तू घर आजा

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॥ पावन पाठ ॥

प्यार के दीप जला जा साई तू घर आजा,

अखा दी प्यास तू भुजा जा साई तू घर आजा,

मेरे दिल पे छाया है तेरे प्यार का जादू,

बस गई है सासो में तेरे प्यार की खुश्बू,

भुजते दीप जला जा साई तू घर आजा,

प्यार के दीप जला जा साई तू घर आजा,

,तेरी मस्त आँखों ने कर दियां है दीवाना,

सारी दुनिया कहती है मुझको तेरा परवाना

अखा दे याम पीला जा साई तू घर आजा,

डूबा डूबा रहता है दिल तेरी महोबत में,

रात दिन तड़प ता है साई तेरी चाहत में,

लुक छुप कर ही आजा साई तू घर आजा,

तुझको ओ मेरे साई हर जगह तुझे देखु,

मेरा दिल ये कहता है हर घडी तुझे देखु,

साई झलक दिख ला जा वे साई तू घर आजा ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।