जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहार

माधुरी मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहार

वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

तूफां में कश्ती चाहे हिचकोले खाये,

भंवर के थपेड़े चाहे जितना डराएं,

जग की खेवनहारा थामे खुद जिसकी पतवार,

वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

मांझी बनेगी जब ये मैया तुम्हारा ,

मझधार में भी तुमको मिलेगा किनारा,

जिसकी रक्षक बनकर बैठी मैया सिंह असवार,

वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

हर्ष तू जीवन नैया इसको थमा दे,

इसके भरोसे प्यारे मौज तू उड़ा ले,

हाथ पकड़ ले जब ये तेरा फिर किसकी दरकार,

वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहार

वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो |

भजन गायिका - माधुरी मधुकर

संपर्क - 0918902154970

स्वर - माधुरी मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।