मत होना मन वनवारे उदास

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

मन में रखना विश्वाश संवारा जरुर आएगा,

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

डोले नैया तेरी हाथो में न पतवार हो,

राहे अनजानी और गोर अन्धकार हो,

इसे अँधेरे में बन के प्रकाश,ये संवारा जरुर आएगा,

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

तेरी लाज नही जाने देगा इतना तू जानना,

कसोटी पे डटे रहना हार नही मान न,

सचे प्रेमी नही होते है निराश,ये संवारा जरुर आएगा,

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

मीरा पी गई थी प्याला इसी विश्वाश पे,

दर पे सुधामा आया बस इसी आस में,

है रजनी को भी एहसास ये संवारा जरुर आएगा,

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

जिसे थामे इक बार हाथ उसका न छोड़ा ता,

भगतो का श्याम भरोसा नही तोडा ता,

सोनू दिल में रखना आस,ये संवारा जरुर आएगा,

मत होना मन वनवारे उदास ये संवारा जरुर आएगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।