होती है मुझपे साई की रहमत कभी कभी

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॥ पावन पाठ ॥

होती है मुझपे साई की रहमत कभी कभी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

होती है मुझपे साई की रहमत कभी कभी

भगतो के आस पास ही साई रहा करो,

पड़ती है मुश्किलों में जरूरत कभी कभी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

शक्ति है साई नाम में भगति में चैन है,

सुमिरन से टल गई है मुसीबत बड़ी बड़ी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

आता है तू साई कश्ती सम्बाल्ने,

तूफ़ान में टूट जाती है हिमत कभी कभी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

माना के ज़िंदगी में हुये है पाप हज़ार,

होती है ज़िंदगी में गलतियां कभी कभी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

जो साथ ना हो तेरा तो जी के कया करे.

आती है याद तेरी अंधेरो में कभी कभी,

ज्योति में देख लेता हु सूरत कभी कभी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।