मेरे झर झर है पांव

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे झर झर है पांव समबालो प्रभु,

अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,

मेरे झर झर है पांव

माया ममता की गलियों में भटका हुआ,

मैं हु तृष्णा के पिंजरे में अटका हुआ,

लाला ध्रिष्णो ने गांव निकालो प्रभु,

मेरे झर झर है पांव...

गहरी नदियां की लहर दीवानी हुई,

टूटे चपु पतवार पुराने हुई,

अब ये डुभे की नाव बचा लो प्रभु ,

अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,

मेरे झर झर है पांव

कोई पथ न किसे ने सुजाया मुझे,

फिर भी देखो कहा की दिखलाया मुझे,

तुमसे मिलने का चाव मिला लो प्रभु,

अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,

मेरे झर झर है पांव

मन को मुरली की धुन का सहारा मिले,

तन को यमुना का शीतल किनारा मिले,

हमको वृन्दावन धाम वसा लो प्रभु,

अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,

मेरे झर झर है पांव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।