माँ भंवरा वाली थारो ही आधार रे | जीण माता भजन

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी मैया म्हाने थारो ही आधार रे

माँ भंवरा वाली थारो ही आधार रे

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

दूजो सहारो हो तो सोचो

और ठिकानों हो तो सोचो

म्हाने तो इक थारो ही आधार

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

थारे बिन म्हारो कोई नहीं है

तू ही बता म्हारो कुन धनि है

आकर के सम्भालो इकबार

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

म्हारी मैया म्हाने थारो ही आधार रे

माँ भंवरा वाली थारो ही आधार रे

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

शहंशाह को गर्व मिटायो

आ सोने को छतर चढायो

चरना में करी माँ पुकार

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

म्हारी मैया म्हाने थारो ही आधार रे

माँ भंवरा वाली थारो ही आधार रे

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

म्हारी मैया म्हाने थारो ही आधार रे

माँ भंवरा वाली थारो ही आधार रे

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

दूजो सहारो हो तो सोचो

और ठिकानों हो तो सोचो

म्हाने तो इक थारो ही आधार

मैं जाऊं तो मैं जाऊं कठे

संपर्क - 09830608619

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।