विद्या वाहनी सरस्वती माँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विद्या वाहनी सरस्वती माँ,

तुझको शीश निमाऊ मैं,

गौरवर्ण हाथो में वीणा कैसे तुम्हे ध्याऊ मैं,

विद्या वाहनी सरस्वती माँ,

सुर लय ताल राग रागनी,

प्रादुर्भाव तुम्हरा है,

ममतामई माँ सिवा तुम्हरे कोई नहीं हमारा है,

स्वराटिका और पतितपावनी कहो कैसे विसराऊ मैं

विद्या वाहनी सरस्वती माँ,.....

देवी भगवत में श्री कृष्ण ने तेरा ही गुणगान किया,

गीता का सन्देश सुना कर अर्जुन का कल्याण किया,

मेरे भी आकंठ बसों माँ महिमा तुम्हारी गाउ मैं,

विद्या वाहनी सरस्वती माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।